हिंदी कहानी सोमवारी अमावस्या और पीपल का पेड़

बीना मोबाइल पर स्क्रोल कर रही थी तभी उसकी नजर पड़ी, एक वाक्य पर |’सोमवारी अमावस्या का व्रत’|सोमवारी अमावस्या का व्रत ;अचानक उसके दिमाग में ख्याल आया मां भी तो करती थी यह व्रत| उस दिन मां बोलती नहीं थी मौन रहती थी| धीरे-धीरे उसका दिमाग बचपन की  यादों में खो गया। उसने सोचा मां भी एक धागा लेकर   पीपल के चारों तरफ घूमती थी |बचपन में वह भी तो उनके साथ जाती थी और देखती थी मां पीपल के पेड़ की परिक्रमा करती थी | उसके बाद फिर घर आकर तब बोलना शुरू करती थी|

बचपन में इन बातों पर उसने कभी विशेष ध्यान नहीं दिया था |उसके लिए तो पीपल का पेड़ था वह जगह ; जहां वह और उसके साथी  खेला – कूदा करते थे| खेलते कूदते कई बार वह लोग पीपल के पेड़ को हाथ लगा कर माथे पर लगा लेते थे और हाथ जोड़कर प्रार्थना कर लेते थे |आते जाते लोगों को उन्होंने हाथ जोड़ते हुए देखा था| बचपन होता ही ऐसा है; प्रयोगो भरा |किसी को कुछ करते हुए देखा तो वह करने की तीव्र इच्छा होती है |शाम को जब पीपल के पेड़ के आसपास खेलते कूदते अंधेरा हो जाता था; तो बड़े बच्चे छोटे बच्चों को डराने के लिए कहते थे इस पीपल के पेड़ पर चुड़ैल आएगी इसीलिए जाओ ,’घर जल्दी भाग जाओ ! बीना को याद था कि कैसे वे सब छोटे बच्चे जल्दी जल्दी घर की तरफ दौड़ जाते थे |उन्हें पीपल के पेड़ का कोई भी महत्व नहीं पता था |वे पीपल के पेड़ के उपयोग के बारे में भी नहीं जानते थे|

समय बीतता गया धीरे-धीरे बिना बड़ी हो गई और बाहर खेलना कूदना भी छूट गया |बस अब कॉलेज आते जाते कभी कभी पीपल के पेड़ पर दृष्टि पड़ जाती थी| अभी बचपन की वह आदत यूं ही थी पीपल के पेड़ के आसपास से गुजरते हुए हमेशा पीपल के पेड़ पर हाथ चला जाता था और हाथ जोड़कर प्रार्थना कर लेती थी|

आज कई सालों के बाद उसे याद आता है तो वह इस धार्मिक मान्यता को उस चीज से जोड़ पाती है |जब उसने सोचा कि  आखिर पीपल के पेड़ की परिक्रमा लगाने का वैज्ञानिक महत्व क्या हो सकता है? बहुत ही साधारण सी बात है पीपल का पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन देता रहता है| ऑक्सीजन देने के कारण जब औरतें पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करतेी हैं तो उनका शरीर अपने आप ऑक्सीजन ग्रहण करता है| अमावस्या के दिन माना जाता है कि लोग नकारात्मक ऊर्जा को घर से बाहर निकालते हैं और सकारात्मक चीजों को अपने अंदर प्रवेश कराते हैं ;ताकि उनके अंदर की नकारात्मकता कम हो| शायद हमारे पूर्वज विद्वानों ने इसीलिए अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ों की 108 बार परिक्रमा करने की विधि बनाई होगी| अपने सुहाग की रक्षा की प्रार्थना करने की विधि बनाई होगी| बीना के मन में भी आया कि वह सोमवारी अमावस्या का उपवास करेगी| उसने अपनी मां को फोन लगाया और तुरंत सोमवारी अमावस्या के बारे में बात करने लगी |मां को आश्चर्य हुआ कि मेरी पढ़ी-लिखी आधुनिक बेटी को अचानक से सोमवारी अमावस्या के उपवास के बारे में इतनी जानकारी लेने की ईच्छा कहां से जागृत हो गई ?परंतु बीना की मां खुश हुई और उन्होंने बीना को सारी जानकारी बताई|इधर ससुराल में भी बीना ने ननंद से पूछा कि यहां पर हमारे ससुराल में कैसी विधि है सोमवारी अमावस्या का व्रत रखने के लिए औरतें क्या विधि अपनाती हैं ?ननंद ने भी पूजा की पूरी विधि बताई| और  बीना ने सोमवारी अमावस्या का व्रत किया| वह सुबह सुबह ही सब सामान के साथ मंदिर पहुंच गई और मंदिर में शिव मंदिर के पास पीपल का पेड़ था जिसकी  उसने १0८बार परिक्रमा भी की |और अन्य प्रार्थनाएं और विधिवत पूजन भी किया |इसके बाद उसे एक अजीब सा सुकून और शांति मिला|

बीना को आज एक बात समझ में आई कि बचपन में हम जो चीजें देखते और सुनते हैं वह जाने अनजाने हम ग्रहण कर लेते हैं। चाहे वह विचारधारा हो या संस्कार हो।