अरे मुसाफिर क्या कहते हैं?
तुमसे धरती, सूरज और चंदा ।
चले चलेो रुकने का नाम न लो।
देखो यह घडी की सुई ।
कदम 👣, बढ़ाते जाओ
अब ठहर गए तुम तो जीवन रुक जाएगा।
चलना ही जीवन है।
रफ्तार बढ़ा कर , मंजिल पालो तुम।
अरे मुसाफिर क्या कहते हैं?
तुमसे धरती, सूरज और चंदा ।
चले चलेो रुकने का नाम न लो।
देखो यह घडी की सुई ।
कदम 👣, बढ़ाते जाओ
अब ठहर गए तुम तो जीवन रुक जाएगा।
चलना ही जीवन है।
रफ्तार बढ़ा कर , मंजिल पालो तुम।