हम सब जानते हैं कि हमारे जीवन में समय समय पर शिक्षकों का मार्गदर्शन और उनकी मदद हमारी कितनी सहायता करती है ,उसी विषय के बारे में यह कहानी है।
राजू कक्षा ग्यारहवीं में पढ़ता था वह स्कूल में काफी होशियार था , बोर्ड की परीक्षा में पूरे स्कूल में दूसरे नंबर पर था ।लेकिन जब से वह कॉलेज में आया था कॉलेज का माहौल अलग लगता था। कॉलेज घर से बहुत दूर था । घरवालों ने उसकी सुविधा के लिए उसे हॉस्टल में रख दिया था । हॉस्टल कॉलेज से लगा हुआ था लेकिन राजू घर से दूर आकर थोड़ा सा दुखी था । वह लोगों से घुल मिल नहीं पाता था। घर का खाना भी नहीं मिल रहा था । किसी तरह कॉलेज की कैंटीन का खाना खा कर गुजारा हो रहा था । कुछ ही दिनों में कॉलेज , के प्रथम सत्र की परीक्षा शुरू हो गई । राजू पूरी तरह से परीक्षा के लिए तैयार नहीं था ;परंतु किसी तरह परीक्षा दे दी । परीक्षा में राजू के इतने अच्छे नंबर नहीं आए जितने अच्छे नंबर उसके विद्यालय में आते थे ।
नंबरों को देखकर उसे काफी दुख हुआ उसने यह कोशिश की जानने की कि उसके परीक्षा में इतने कम अंक क्यों आए ?तब उसे लगा की उसने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके पढ़ाई नहीं किया बल्कि परिस्थितियों के , सामने हार मान ली।
उसे लगने लगा कि उसे थोड़ी और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है परंतु पढ़ाई में उसका मन नहीं लग रहा था अब उसे अपना भविष्य अंधकार में दिख रहा था । एक दिन यही सोचते हुए वह सीढ़ियां चढ़ रहा था कि अचानक सामने से साइंस के प्रोफेसर से टकरा गया ।साइंस के प्रोफेसर दाभोलकर सर बहुत ही भले इंसान थे । राजू हड़बड़ा गया था। सॉरी सर सॉरी सर कह कर , खड़ा हो गया ।उन्होंने राजू से पूछा कि वह कुछ परेशान दिख रहा है क्या बात है ?सर ने उससे कहा कि वह , रिसेस में स्टाफ रूम में आकर उनसे मिले। राजू स्टाफ रूम में जाकर उनसे मिला सर ने उससे पूछा कि, “तुम कुछ परेशान से दिखाई देते हो अक्सर क्लास में भी तुम्हारा ध्यान नहीं रहता है क्या बात है? “राजू ने कहा सर पता नहीं क्यों मैं इस माहौल में एडजस्ट नहीं हो पा रहा हूं। सर ने उसे कहा, कक्षा बारहवीं के सीनियर लड़कों से मैं तुम्हारी दोस्ती करा देता हूं ,:जो पढ़ने में काफी अच्छे हैं तुम्हें उनका साथ मिलेगा तो तुम्हें प्रेरणा मिलेगी । सर ने राजू की पहचान बारहवीं कक्षा क बहुत अच्छे विद्यार्थियों से करवाई जो पढ़ने में बहुत ही ज्यादा अच्छे थे। वह बच्चे सुबह-सुबह ही लाइब्रेरी में पहुंच जाते थे और पढ़ाई करते थे। ना वे कोचिंग में जाते थे, ना कहीं ट्यूशन पढ़ने जाते थे। कॉलेज के टीचर से ही अपनी डिफिकल्टी बताकर सॉल्यूशन मांग लेते थे। राजू को उनसे मिलकर बहुत प्रेरणा मिली और राजू ने भी सुबह-सुबह कॉलेज की लाइब्रेरी में जाना शुरू कर दिया । साथ ही पढ़ाई में जहां कुछ नहीं समझ में आता था, वह भी उन विद्यार्थियों से पूछना शुरू किया। उन विद्यार्थियों का साथ पाकर राजू का पढ़ाई में बहुत ज्यादा मन लगने लगा और यही नहीं उसने बहुत अच्छे नंबरों से परीक्षा, भी उत्तीर्ण की। रिजल्ट वाले दिन उसने दाभोलकर सर को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया। साथ ही उसने अपने सीनियर विद्यार्थियों को भी धन्यवाद दिया ।
सचमुच कभी-कभी शिक्षकों की थोड़ी सी मदद और मार्गदर्शन विद्यार्थियों का जीवन बदल देती है।

समस्या से ज्यादा समाधान देखें…
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Nice 👍
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