आंखें चुराना-बच के निकलना /सामना ना करना |
स्पष्टीकरण -इंसान किसी के सामने जानबूझकर नहीं आता है ,उससे बचकर निकल जाता है या किसी का सामना करने से डरता है ;तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है |
वाक्य प्रयोग -१नीरव जब लोगों से लिए हुए उधार नहीं चुका पाया तो लोगों से आंखें चुराने लगा |
२-चंदा के पति की मृत्यु के बाद उसके रिश्तेदार इस डर से उससे आंखें चुराने लगे कि वह कहीं कोई सहायता ना मांग ले|
